हिमाचल प्रदेश का नक्शा

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश को देव भूमि भी कहा जाता है और यह उत्तर में जम्मू कश्मीर से, पश्चिम में पंजाब से, दक्षिण में उत्तर प्रदेश से और पूर्व में उत्तराखंड से घिरा है। हिमाचल शब्द का अर्थ ‘बर्फ का घर’ होता है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला है और राज्य का कुल क्षेत्रफल 55,673 वर्ग किमी. है। यह राज्य प्राकृतिक सुंदरता का खजाना है और विश्व के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। राज्य का ज्यादातर हिस्सा उंची पर्वत श्रृंखलाओं, गहरी घाटियों, सुंदर झरनों और हरियाली से भरा है। यहां का मौसम जगह के हिसाब से बदलता रहता है। कुछ जगहों पर भारी बरसात होती है और कुछ जगहों पर बिलकुल वर्षा नहीं होती। उंचाई पर स्थित होने के कारण इस राज्य में बर्फबारी आम बात है। राज्य में 12 जिले हैं जो प्रशासनिक सुविधा के लिए मंडलों, गांवों और कस्बों में बंटे हंै। हिमाचल प्रदेश, देश का दूसरा सबसे कम भ्रष्ट राज्य है। सेब के भारी उत्पादन के कारण हिमाचल प्रदेश को ‘सेब का राज्य’ भी कहा जाता है।

हिमाचल प्रदेश का इतिहास

हिमाचल प्रदेश का इतिहास बहुत समृद्ध है क्योंकि सभ्यता की शुरुआत से ही यहां विभिन्न कालों में कई वंश रहे हैं। सबसे पहले सिंधु घाटी सभ्यता के लोग यहां आकर रहे। दूसरी या तीसरी सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व वह लोग गंगा के मैदानों से यहां शांतिपूर्ण जीवन की खोज में आए थे। जल्द ही मंगोलियों ने क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और फिर आर्य आए। भारतीय महाकाव्य के अनुसार, हिमाचल प्रदेश कई छोटे जनपदों और गणराज्यों का समूह था जिसके हर राज्य की एक सांस्कृतिक इकाई थी। उसके बाद मुगल आए जिसके राजा महमूद गजनवी, सिकंदर आदि थे। इन लोगों ने इस क्षेत्र को जीता और यहां अपना वर्चस्व स्थापित किया।

जब उनके शासन का पतन होने लगा तब गोरखाओं ने इस भूमि पर कब्जा कर लिया। जल्दी ही एंग्लो-गोरखा युद्ध के दौरान उन्होंने यह राज्य अंग्रेजों के हाथों खो दिया। अंग्रेज इस राज्य की खूबसूरती के कायल हो गए। उन्होंने इस जगह पर सन् 1854 से 1914 तक राज किया। आजादी के बाद सन् 1948 में 30 रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश का गठन किया गया। जब पंजाब का भौगोलिक तौर पर पुनर्गठन हुआ तो कुछ भाग इसमें चला गया। सन् 1971 में हिमाचल प्रदेश भारतीय संघ का 18वां राज्य बनकर उभरा

हिमाचल प्रदेश का भूगोल

पश्चिमी हिमाचल की तलहटी में स्थित होने के कारण हिमाचल प्रदेश समुद्र तल से 6500 मीटर की उंचाई पर है। इसकी उंचाई पश्चिम से पूर्व और उत्तर से दक्षिण की ओर है। भौगोलिक तौर पर यह क्षेत्र तीन श्रेणियों में बंटा हैः बाहरी हिमालय यानि शिवालिक, भीतरी हिमालय यानि सेंट्रल ज़ोन और ग्रेटर हिमालय यानि अल्पाइन ज़ोन। हिमाचल प्रदेश अपनी फैली हुई घाटियों, बर्फ से ढंके पहाड़ों, खूबसूरत झीलों और नदियों और इठलाते झरनों के लिए प्रसिद्ध है। राज्य का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा जंगलों से ढंका है जिसमें देवदार के जंगल, बान ओक वन, शंकुधारी जंगल, अल्पाइन चराइ, रुखे पतझड़ी जंगल और बुरुंश के जंगल शामिल हैं। यहां की जलवायु अत्यधिक ठंडी से सेमी ट्रापीकल है।

यहां की गर्मियां अप्रैल से जून तक रहती हैं, जिसमें मौसम काफी सुहावना रहता है और भारी बर्फबारी की वजह से सर्दियां अत्यधिक ठंडी रहती हैं। बरसात का मौसम यहां की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है। यह मौसम जुलाई से सितंबर तक रहता है। बरसात में नदियां और झरने फिर से भर जाते हैं और हरियाली साल भर देखी जा सकती है। यहां की मुख्य नदियां चंद्र भागा, ब्यास, चिनाब, सतलज और रावी हैं। यह नदियां साल भर बहती हैं और मुख्य तौर पर पर्वतों के ग्लेशियर से पलती हैं। हिमाचल प्रदेश के कुछ ग्लेशियर बारा शिरी, भागा, चंद्रा हैं।

हिमाचल प्रदेश की सरकार और राजनीति

राज्य 12 जिलांे, 75 तहसीलों, 52 उपमंडलों, 75 ब्लाॅक और 20,000 से ज्यादा गांवों और 57 कस्बों में बंटा है। आजादी के बाद गठन होने के कारण हिमाचल प्रदेश की विधानसभा का कोई पूर्व संविधान नहीं है। राज्य की एक सदनीय विधायिका में विधानसभा में 68 सीट और 14 हाउस कमेटियां हैं। यहां चार लोक सभा क्षेत्र हैं और तीन सीटंे राज्य सभा की हैं। राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी हैं। हिमाचल प्रदेश में बारी बारी से इन्हीं दलों की सरकार बनती है। भारत के अन्य राज्यों की तरह सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री हैं, जिनके पास विशेष कार्यकारी अधिकार हैं। सरकार के सभी प्रमुख संचालन को यह नियंत्रित करते हैं।

शिक्षा

हिमाचल प्रदेश गर्मियों में ब्रिटिश भारत की राजधानी था इसलिए इसकी स्कूली और उच्च शिक्षा का स्तर देश के बाकी हिस्सों के बराबर रहा। राज्य की साक्षरता दर देश के बाकी राज्यों के मुकाबले उंची है और खासतौर पर हमीरपुर जिले की साक्षरता दर सबसे अधिक है। राज्य में हजारों स्कूल हैं जो प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा देते हंै और ये या तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या फिर आईसीएसई से संबद्ध हैं। सरकार राज्य को देश का नया शिक्षा हब बनाने हेतु प्रयासरत है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने प्राथमिक शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाना मुमकिन किया है।

यहां कई यूनिवर्सिटी, इंजीनीयरिंग काॅलेज और मेडिकल काॅलेज हैं जो इच्छुक उम्मीदवारों को व्यवसायिक पाठ्यक्रम मुहैया कराते हैं। इसके अलावा कई सामान्य डिग्री काॅलेज भी हैं जहां से बुनियादी उच्च शिक्षा प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित काॅलेज भी हैं।

अर्थव्यवस्था

हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में से एक है जिसने खुद को सबसे पिछड़े राज्य से सबसे उन्नत राज्य में तब्दील किया है। राज्य की 50 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। कृषि यहां के लोगों की आय का प्राथमिक स्रोत है। राज्य की महत्वपूर्ण फसलों में चावल, जौ, मक्का और गेंहू शामिल है। हिमालय की गोद में बसा होने के कारण हिमाचल की भूमि उपजाउ है और फलों की खेती के लिए अनुकूल है। सेब की खेती से राज्य को हर साल 300 करोड़ रुपये की आय होती है। यहां खेती किये जाने वाले अन्य फलों में अंजीर, जैतून, हाॅप, नट्स, मशरुम, केसर और शारदा खरबूज हैं। सहायक बागवानी के तौर पर यहां शहद और फूल भी पैदा होता है। स्थानीय निवासियों के लिए पर्यटन आय का अच्छा स्रोत है और राज्य की अर्थव्यवस्था में सहायक है। बिजली की प्रचुरता के कारण यहां कई लघु उद्योगों की स्थापना हुई है। यहां के प्रदूषण रहित वातावरण के कारण राज्य में कई इलेक्ट्राॅनिक परिसर भी स्थापित हुए हंै। इसकी वजह से राज्य का आर्थिक विकास तेजी से हुआ है।

जनसांख्यिकी

सन् 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश की कुल जनसंख्या 68,64,602 है जो कि देश की आबादी का बहुत छोटा हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में से है जिसमें हिंदुओं की जनसंख्या सबसे अधिक है। यहां करीब 90 प्रतिशत हिंदू हैं। इनमें भी मुख्य समुदाय राजपूत है जो कि बहुत पहले यहां आकर बस गए थे। ब्राम्हण और राठी भी राज्य की आबादी का मुख्य हिस्सा हैं। घीर्थ समुदाय या चैधरी समुदाय ज्यादातर कांगड़ा जिले में बसता है। यह लोग अक्सर जमीन के मालिक होते हैं जो अपनी भूमि गरीब किसानों को खेती के लिए किराये पर देते हैं और उनसे पैसे लेते हैं। अन्य समुदायों में कन्नेत, कोली, गड्डी, गुज्जर, लाहौली और पंगवाल हैं।

राज्य के ग्रामीण भाग में मजबूत जाति व्यवस्था है लेकिन आधुनिकता आने के साथ स्थितियां बदल रही हैं। हिमाचल प्रदेश में तिब्बतियों की भी अच्छी खासी आबादी है और हिंदू धर्म के बाद बौद्ध धर्म दूसरा प्रमुख धर्म है। तिब्बत के शरणार्थी होेने के कारण यह ज्यादातर सामूहिक रुप से लाहौल और किन्नौर में रहते हैं। राज्य की सीमा पंजाब से बंटी होने के कारण सिख समुदाय के लोग भी शहरों और कस्बों में रहते हैं। मुसलमानों की संख्या राज्य में कम है।

हिमाचल प्रदेश का पर्यटन

अपनी खूबसूरती और विविधता के कारण निश्चित तौर पर हिमाचल प्रदेश यात्रा करने का सबसे अच्छा स्थान है। बर्फ से ढंके पहाड़ों, हरे भरे जंगलों, लाल सेब के बागों और ताजा शुद्ध हवा के कारण राज्य में वह सब कुछ है जिसकी वजह से दुनिया भर के लोग इसकी ओर खिंचे चले आते हैं। शिमला, मनाली, चंबा आदि ऐसी जगहें हैं जहां सालभर दंपत्ति हनीमून मनाने आते हैं। इसके अलावा लोग यहां पहाड़ों के रोमांच, रिवर राफ्टिंग, आईस स्केटिंग, पैरा ग्लाईडिंग और स्किइंग के मजे करने या फिर शांतिपूर्ण छुट्टी बिताने आते हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां मंदिर, चर्च, मठ, नदियां, हिल स्टेशन, वास्तुकला के नमूने और बाजार हैं।

धर्मशाला यहां का सबसे ठंडा हिल स्टेशन है। धर्मशाला में बर्फीली घाटियां, वनस्पति, जीव और ताजगी हैं जो प्रकृति की देन हैं। शिमला में पर्यटक जाखू पहाड़ी, रिज, लक्कर बाजार, सेंट माइकल कैथेड्रल, राज्य संग्रहालय का मजा ले सकते हैं या फिर माॅल रोड पर तफरीह कर सकते हैं। मशोरबा, कुफरी, फागु कुछ ऐसे उपनगर हैं जो राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती का मनमोहक नजारा देते हैं। कुल्लू, चैल, कसौली, मणीकर्ण, डलहौजी आदि हिमाचल प्रदेश की घूमने लायक जगहें हैं। नागर, पहाड़पुर और रुक्खाला शहरी पर्यटकों को ग्रामीण जीवन की विरासत से रुबरु कराते हैं।

हिमाचल प्रदेश में देखने योग्य शहर

  • चंबा
  • कांगड़ा
  • रोहतांग पास
  • शिमला
  • कुल्लू
  • मनाली
  • डलहौजी
  • सोलन

हिमाचल प्रदेश का समाज और संस्कृति

हिमाचल प्रदेश एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राज्य है। क्योंकि प्राचीन समय से ही यहां कई नस्ले आकर बसती गईं थीं इसलिए हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत बहुत विविध, रंगीन और समृद्ध है। इसका प्रदर्शन यहां के रंगीन कपड़ों, मीठे संगीत, त्यौहार के उत्सव, लयबद्ध नृत्य और सरल लेकिन समृद्ध जीवनशैली में होता है। कला और हस्तशिल्प यहां की संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। राज्य की विशेषता पश्मिना शाॅल तैयार करना है जो कि नियमित तौर पर विदेशों में निर्यात की जाती है। इसके अलावा लकड़ी के बर्तन, धातु के आभूषण, बर्तन भी स्थानीय लोगों के द्वारा बनाए जाते हैं। संगीत और नृत्य हिमाचलियों के जीवन का खास हिस्सा है। देवी-देवताओं के आव्हान के लिए अक्सर लोक गीत गाए जाते हैं। यहां के लोगों के बीच भारतीय रागों पर आधारित विशेष गाने जिन्हें संस्कार गीत कहा जाता है, लोकप्रिय हैं। राज्य की विशेष नृत्य शैलियां शोना, घी, बुराह, लोसर, नाटी आदि हैं। यहां त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। हर साल धर्मशाला में अंतर्राष्ट्रीय हिमालय फेस्टिवल मनाया जाता है। यहां के स्थानीय त्यौहारों में लाहौलियों के चीशु और लाहौल और कांगड़ा जिले का त्यौहार हरियाली है जो कि बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए राष्ट्रीय त्यौहार जैसे दीपावली, लोहड़ी, बैसाखी और क्रिसमस भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।

हिमाचल प्रदेश की भाषा

उत्तर भारत का राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश में सभी के द्वारा हिंदी भाषा बोली और समझी जाती है।
इसके अलावा दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा पहाड़ी है जो कि संस्कृत और प्राकृत से बनी है। इस भाषा के तीन रुप हैं – उत्तरी पहाड़ी, पश्चिमी पहाड़ी और पूर्वी पहाड़ी। इस में से दूसरा रुप हिमाचल प्रदेश के लोगों ने अपनाया है और इसे विभिन्न बोलियों में बोलते हैं। हिमाचल प्रदेश में बोली जाने वाली पहाडि़यों के कुछ रुप चुराही, हिमाचली, मंडेली, कुलुही आदि हैं। पंजाब से राज्य की करीबी के कारण पंजाबी भी राज्य की लोकप्रिय भाषा है। स्कूलों में पढ़ाने के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा क्षेत्रीय लोगों द्वारा कांगड़ी, डोगरी, किन्नौरी भी बोली जाती है। यहां आकर बसे तिब्बती लोग तिब्बती भाषा में ही बात करना पसंद करते हैं। इसके अलावा अन्य राज्यों से आए लोग जैसे मारवाड़ी, गुजराती, बिहारी, बंगाली आदि अपने समुदाय में खुद की भाषा में ही बात करते हैं।

परिवहन

हिमाचल प्रदेश का ज्यादातर इलाका पहाड़ी है इसलिए यहां परिवहन सुविधाओं का विकास करना बहुत मुश्किल है। हालांकि हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस दिशा में बहुत कार्य किया और आज की स्थिति में देश के बाकी हिल स्टेशनों के मुकाबले यहां की सड़कों का घनत्व बहुत है। आठ राष्ट्रीय राजमार्ग इस राज्य को देश के बाकी हिस्से से जोड़ते हैं। राज्य के अंदर पर्यटकों की सुविधा के लिए सभी पर्यटन स्थल सड़क मार्ग से जुड़े हैं। शहरों के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए लोग निजी वाहन और बसों का प्रयोग करते हैं। दो रेलवे मार्ग इस राज्य को सारे देश से जोड़ते हैं, कालका-शिमला रेलवे और पठानकोट-जोगिंदरनगर रेलवे। अच्छी कनेक्टिविटी के लिए सरकार ने दो और ट्रेक का प्रस्ताव दिया है। राज्य के तीन हवाई अड्डों- शिमला हवाई अड्डा, गग्गल हवाई अड्डा और भुंटर हवाई अड्डे के जरिए हिमाचल प्रदेश पहुंचा जा सकता है। हालांकि खराब मौसम के चलते ज्यादातर उड़ाने या तो रद्द रहती हैं या देरी से उड़ती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है।

क्र.सं. जिला का नाम जिला मुख्यालय जनसंख्या (2011) विकास दर लिंग अनुपात साक्षरता क्षेत्र (वर्ग किमी) घनत्व (/ वर्ग किमी)
1 बिलासपुर बिलासपुर 381956 12.05% 981 84.59 1167 327
2 चंबा चंबा 519080 12.63% 986 72.17 6528 80
3 हमीरपुर हमीरपुर 454768 10.19% 1095 88.15 1118 406
4 कांगड़ा धर्मशाला 1510075 12.77% 1012 85.67 5739 263
5 किन्नौर रेकोंग पो 84121 7.39% 819 80 6401 13
6 कुल्लू कुल्लू 437903 14.76% 942 79.4 5503 79
7 लाहौल और स्पीती केलांग 31564 -5.00% 903 76.81 13835 2
8 मंडी मंडी 999777 10.92% 1007 81.53 3950 253
9 शिमला शिमला 814010 12.67% 915 83.64 5131 159
10 सिरमौर नाहन 529855 15.54% 918 78.8 2825 188
11 सोलन सोलन 580320 15.93% 880 83.68 1936 298
12 उना ऊना 521173 16.26% 976 86.53 1540 328

 

बिलासपुर

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश, भारत के बिलासपुर जिले में एक शहर और नगर पालिका है।

इतिहास

बिलासपुर 7 वीं शताब्दी में स्थापित उसी नाम की एक राज्य की राजधानी थी, जिसे कहलूर भी कहा जाता था। सत्तारूढ़ राजवंश चंदेला राजपूत थे, जिन्होंने वर्तमान में मध्यप्रदेश में चंदेरी के शासकों से वंश का दावा किया था। बिलासपुर शहर 1663 में स्थापित किया गया था। राज्य बाद में ब्रिटिश भारत की रियासत बन गया, और पंजाब के ब्रिटिश प्रांत के अधिकार में था।

13 मई 1665 को, गुरु तेग बहादुर बिलासपुर के राजा दीप चंद के लिए शोक और अंतिम संस्कार समारोह में भाग लेने के लिए बिलासपुर गए थे। बिलासपुर के रानी चंपा ने अपने राज्य में भूमि के एक टुकड़े के गुरु को एक प्रस्ताव दिया, जिसे गुरु 500 रुपये की लागत से स्वीकार कर लिया। भूमि में लोडिपुर, मियांपुर और सहोटा के गांव शामिल थे। गुरु तेग बहादुर ने 19 जून 1665 को एक नए समझौते पर जमीन तोड़ दी, जिसे उन्होंने अपनी मां के बाद नानाकी नाम दिया।

1932 में, राज्य नव निर्मित पंजाब राज्य एजेंसी का हिस्सा बन गया, और 1 9 36 में पंजाब हिल स्टेट्स एजेंसी पंजाब राज्य एजेंसी से अलग हो गई थी। 12 अक्टूबर 1948 को स्थानीय शासक राजा सर आनंद चंद ने भारत सरकार से समझौता किया।

बिलासपुर एक मुख्य आयुक्त के तहत भारत का एक अलग राज्य बन गया, और 1 जुलाई 1954 को, बिलासपुर राज्य को भारतीय संसद के एक अधिनियम द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य का जिला बनाया गया। जब सतलज नदी को गोविंद सागर बनाने के लिए बांध दिया गया था, तब बिलासपुर का ऐतिहासिक शहर डूबा गया था, और एक नया शहर पुराने लोगों का अपहरण कर रहा था।

जलवायु

बिलासपुर गर्म गर्मियों और ठंडी सर्दियों का अनुभव करता है लेकिन घाटी में इसकी स्थिति से आसपास के पहाड़ों के तापमान चरम सीमा से संरक्षित है। मानसून, जुलाई से सितंबर तक, उच्च वर्षा की अवधि है। अक्टूबर से नवंबर तक, झील पूरी तरह से भरा हुआ है। उच्च तापमान तापमान मई और जून होते हैं जब तापमान आमतौर पर लगभग 37 डिग्री सेल्सियस (99 डिग्री फ़ारेनहाइट) और 38 डिग्री सेल्सियस (100 डिग्री फ़ारेनहाइट) होता है, कभी-कभी 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फारेनहाइट) से अधिक होता है।

ऊंचाई  – 673 m

चंबा

चंबा (हिंदी: चंबा) उत्तरी भारत में हिमाचल प्रदेश राज्य के चंबा जिले में एक शहर है। 2001 की भारतीय जनगणना के अनुसार यह शहर सा नदी के साथ अपने संगम पर रवि नदी (ट्रांस-हिमालयी सिंधु नदी की एक प्रमुख सहायक) के तट पर स्थित है। चंबियल चंबा राज्य के शासक थे चंबियाल प्रत्यय वर्मन्स का उपयोग करते हैं।

हालांकि ऐतिहासिक रिकॉर्डों ने चंबा क्षेत्र के इतिहास को दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कोलिअन जनजातियों के इतिहास की तारीख दी थी, लेकिन इस क्षेत्र को औपचारिक रूप से मारु राजवंश द्वारा शासित किया गया था, जो लगभग 500 ईस्वी से राजू मारू से शुरू हुआ था, जो भर्मौर की प्राचीन राजधानी से शासन करता था, जो कि है चंबा शहर से 65 किलोमीटर (40 मील) स्थित है।  920 में, राजा साहिल वर्मन (या राजा साहल वर्मा) ने अपनी बेटी चंपावती के विशिष्ट अनुरोध के बाद राज्य की राजधानी चंबा को स्थानांतरित कर दिया, जिन्होंने आगे एक बच्चे नामित पं। शिव कुमार उपमान्यु  (चंबा का नाम उनके नाम पर रखा गया था) )। राजू मारू के समय से, इस राजवंश के 67 राजाओं ने चंबा पर शासन किया जब तक कि अंततः अप्रैल 1 9 48 में भारतीय संघ के साथ विलय नहीं हुआ, हालांकि चंबा 1846 से इस समय ब्रिटिश स्वीकृति के अधीन थीं।

इस शहर में कई मंदिर और महल हैं, [3] [4] और दो लोकप्रिय जात्रा (मेले), “सुही माता मेला” और “मिंजार मेला” होस्ट करते हैं, जो संगीत और नृत्य के कई दिनों तक चलते हैं। चंबा भी अपने कला और शिल्प, विशेष रूप से इसकी पहारी चित्रों के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसका जन्म 17 वीं और 1 9वीं शताब्दी के बीच उत्तर भारत के हिल साम्राज्यों और इसके हस्तशिल्प और वस्त्रों के बीच हुआ था।

ऊंचाई – 996 m

हमीरपुर

हमीरपुर (हिंदी | हमीरपुर) हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश, भारत के हमीरपुर जिले का एक शहर और मुख्यालय है। हमीरपुर पश्चिमी हिमाचल प्रदेश के अपेक्षाकृत ठंडा क्षेत्र में स्थित है, जो राज्य के अन्य जिलों की तुलना में कम ऊंचाई के साथ है।

हमीरपुर का सटीक भौगोलिक समन्वय 31.68 डिग्री एन 76.52 डिग्री ई है, [3] और औसत ऊंचाई 738 मीटर (2,421 फीट) है।

ऊंचाई – 738 m

कंगड़ा

कंगड़ा अब भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में कंगड़ा जिले में एक नगर और नगरपालिका परिषद है। ऐतिहासिक रूप से इसे नागकोट के नाम से जाना जाता था।
कांगड़ा 32.1 डिग्री एन 76.27 डिग्री ई पर स्थित है। [8] इसकी औसत ऊंचाई 733 मीटर (2404 फीट) है। कंगड़ा जिला जलंधर डोआब से हिमालय की दक्षिणी श्रृंखला 
तक फैली हुई है। यह बर्नर नदी और माजी नदी के संगम पर एक शहर है, और बीस यहां एक महत्वपूर्ण नदी है

ऊंचाई – 733 m

किन्नौर

किन्नौर भारत के हिमाचल प्रदेश, भारत के बारह प्रशासनिक जिलों में से एक है। जिला तीन प्रशासनिक क्षेत्रों – पूह, कालपा, और निचर (भाबनगर) में बांटा गया है – और इसमें छह तहसील (काउंटी) हैं। किन्नौर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय रेकॉन्ग पीओ में है। यहां से किन्नौर कैलाश, जिसे भगवान शिव का निवास माना जाता है, देखा जा सकता है। 2011 तक, यह लाहौल और स्पीति के बाद, हिमाचल प्रदेश (12 जिलों में से) का दूसरा सबसे कम आबादी वाला जिला है,  जिले में नौ महत्वपूर्ण भाषाएं बोली जाती हैं

जलवायु

किन्नौर में हिंदुस्तान-तिब्बत राजमार्ग 1980 में कैनर कैलाश अक्टूबर से मई तक लंबी सर्दियों के साथ, जून से सितंबर तक के गर्म सर्दियों के साथ, इसकी उच्च ऊंचाई के कारण अधिकांश किन्नौर समशीतोष्ण वातावरण का आनंद लेते हैं। सतलज घाटी और बसपा घाटी के निचले हिस्सों में मानसून बारिश होती है। घाटियों के ऊपरी क्षेत्र मुख्य रूप से वर्षा-छाया क्षेत्र में गिरते हैं। इन क्षेत्रों को तिब्बत के जलवायु के समान शुष्क क्षेत्रों माना जाता है। मध्य एशियाई परिदृश्य आम हैं। 2016 में आईआईटी दिल्ली के एक अध्ययन ने स्थापित किया कि किन्नौर जिले में काउंटर में सबसे साफ हवा है

ऊंचाई – 6050 m

कुल्लू 

कुल्लू या कुल्लू भारतीय हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले का राजधानी शहर है। यह कुल्लू घाटी में बीस नदी के तट पर भंटार में हवाई अड्डे के 10 किलोमीटर (6.2 मील) उत्तर में स्थित है।

कुल्लू घाटी मनाली और बंगी के बीच बीस नदी द्वारा बनाई गई एक विस्तृत खुली घाटी है। यह घाटी अपने मंदिरों और इसकी पहाड़ियों के लिए पाइन और देवदार जंगल और फैला हुआ सेब बागानों के लिए जाना जाता है। बीस नदी के पाठ्यक्रम में कम चट्टानी चट्टानों पर पाइन के पेड़ों के ऊपर, देवदार के जंगलों के साथ शानदार, उत्तराधिकारी का उत्तराधिकारी प्रस्तुत किया गया है। कुल्लू घाटी पीर पंजाल, लोअर हिमालयी और ग्रेट हिमालयी रेंज के बीच सैंडविच है।

जलवायु

सर्दी के दौरान दिसंबर और जनवरी में कुछ बर्फबारी के साथ -4 से 20 डिग्री सेल्सियस (25 से 68 डिग्री फारेनहाइट) तक के सबसे कम तापमान का निरीक्षण होता है। सर्दियों के दौरान सुबह और सुबह बहुत ठंडा होता है। गर्मियों में वार्षिक उच्चतम तापमान मई से अगस्त के दौरान 24 से 34 डिग्री सेल्सियस (75 से 9 3 डिग्री फारेनहाइट) तक रहता है। जुलाई और अगस्त के महीनों में मानसून की वजह से बारिश होती है, जिसमें लगभग 150 मिमी (5.9 इंच) वर्षा होती है। अक्टूबर और नवंबर में जलवायु सुखद है।

वायु
निकटतम हवाई अड्डा (आईएटीए कोड केयूयू) कुल्तु शहर के लगभग 10 किमी (6.2 मील) दक्षिण में पार्वती और बीस नदियों (अक्षांश 31.8763 एन और देशांतर 77.1541 ई) के संगम पर एनएच 21 पर स्थित भंटार शहर में स्थित है। हवाई अड्डे को कुल्लू-मनाली हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है और इसमें एक किलोमीटर से अधिक रनवे है। भारतीय एयरलाइंस और कुछ निजी एयरलाइंस के पास हवाईअड्डे के लिए नियमित उड़ानें हैं। हिमालय बुल्स ने डेक्कन चार्टर्स के सहयोग से 2 अप्रैल 2014 से कुल्लू-चंडीगढ़-कुल्लू सेक्टर पर उड़ानें शुरू कीं, जिसमें आठ सीट वाले विमानों में प्रत्येक दिन 2 से 3 अनुसूचित उड़ानें थीं।

ऊंचाई – 1,279 m

लाहौल और स्पीती

हिमाचल प्रदेश के भारतीय राज्य में लाहौल-स्पीति जिले में लाहौल और स्पीति के दो अलग-अलग जिलों में शामिल हैं। लाहौल में वर्तमान प्रशासनिक केंद्र कीलोंग है। दो जिलों में विलय होने से पहले, कार्तांग लाहौल की राजधानी थी, और स्पीति की राजधानी धंकर थी। जिला 1 9 60 में गठित किया गया था, और यह भारत का चौथा सबसे कम आबादी वाला जिला है (640 में से)। [1]

कुंजम ला या कुंजम पास (ऊंचाई 4,551 मीटर (14, 9 31 फीट)) लाहौल से स्पीति घाटी के प्रवेश द्वार है। यह चंद्र ताल से 21 किमी (13 मील) है। [2] यह जिला रोहतंग पास के माध्यम से मनाली से जुड़ा हुआ है। दक्षिण में, स्पीति तामो से 24 किमी (15 मील), सुमोडो में समाप्त होती है जहां सड़क किन्नौर में प्रवेश करती है और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 22 के साथ मिलती है। [3]

चरित्र में दो घाटियां काफी अलग हैं। 4,270 मीटर (14,010 फीट) की घाटी के तल की औसत ऊंचाई के साथ, स्पीति अधिक बंजर और पार करना मुश्किल है। यह ऊंची पर्वतमाला के बीच संलग्न है, जिसमें स्प्लिटी नदी दक्षिणपूर्व में एक दल से बाहर निकलती है ताकि सतलज नदी से मिल सके। यह एक सामान्य पर्वत रेगिस्तान क्षेत्र है जिसमें औसत वार्षिक वर्षा केवल 170 मिमी (6.7 इंच) है।

ऊंचाई – 4,270 m

मंडी

मंडी, जिसे पहले मांडव नगर के रूप में जाना जाता था,  जिसे सहोर (तिब्बती: ज़हर) भी कहा जाता है,  एक प्रमुख शहर है और एक भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में मंडी जिले में नगरपालिका परिषद।

यह 850 मीटर (2,7 9 0 फीट),  की औसत ऊंचाई पर उत्तर-पश्चिम हिमालय में राज्य राजधानी, शिमला [6] के 153 किलोमीटर (9 5 मील) उत्तर में स्थित है और सुखद गर्मियों और ठंडे सर्दियों का अनुभव करता है। मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग 20 के माध्यम से पठानकोट से जुड़ा हुआ है जो लगभग 220 किमी (140 मील) लंबा और मनाली और चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग 21 के माध्यम से 323 किमी (201 मील) लंबा है। चंडीगढ़ से मंडी लगभग 184.6 किमी (114.7 मील) है, [8] निकटतम प्रमुख शहर, और नई दिल्ली से 440.9 किमी (273.9 मील), [9] राष्ट्रीय राजधानी है। 2011 की भारतीय जनगणना में, मंडी शहर की जनसंख्या 26,422 थी।  मंडी जिला वर्तमान में कंगड़ा के बगल में राज्य की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मंडी, राज्य में प्रति हजार पुरुष 1013 महिलाओं का दूसरा सबसे बड़ा लिंग अनुपात है।

यह मंडी जिला और केंद्रीय क्षेत्र के क्षेत्रीय मुख्यालयों के मुख्यालय के रूप में कार्य करता है जिसमें कुल्लू, बिलासपुर और हमीरपुर शामिल हैं। एक पर्यटक स्थान के रूप में, मंडी को अक्सर “पहाड़ियों की वाराणसी”  या “चोटी काशी”  या “हिमाचल का काशी” कहा जाता है। इसके अलावा, मंडी क्षेत्र झील ट्रेक के प्रसिद्ध ट्रेक के लिए मंडी शुरुआती बिंदु है। मंडी से, ट्रेकर्स बागी गांव जाते हैं, जो प्रशसार झील के लिए बेस गांव के रूप में कार्य करता है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) शहर में स्थित एक प्रमुख संस्थान है।  मंडी की रियासत की यह एक बार राजधानी एक तेज़ विकासशील शहर है जो अभी भी अपने मूल आकर्षण और चरित्र को बरकरार रखती है। यह शहर 1527 में अजबर सेन द्वारा स्थापित किया गया था,  1948 तक एक रियासत राज्य मंडी राज्य की सीट के रूप में। शहर की स्थापना 1948 की शुरुआत में हिमाचल प्रदेश की स्थापना पर रखी गई थी। आज, यह व्यापक रूप से जाना जाता है अंतर्राष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि मेला। हिमाचल प्रदेश का पहला विरासत शहर। शहर में पुराने महल और ‘औपनिवेशिक’ वास्तुकला के उल्लेखनीय उदाहरण भी हैं। शहर हिमाचल प्रदेश की सबसे पुरानी इमारतों में से एक था

ऊंचाई – 850 m

शिमला

शिमला, जिसे सिमला के नाम से भी जाना जाता है, उत्तरी भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। शिमला भी एक जिला है जो उत्तर में मंडी और कुल्लू, पूर्व में किन्नौर, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखंड राज्य और सोलन और सिरमौर से घिरा हुआ है। 1864 में, शिमला को ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया था, रावलपिंडी के पूर्वोत्तर मुरी के उत्तराधिकारी थे। आजादी के बाद, शहर पंजाब की राजधानी बन गया और बाद में हिमाचल प्रदेश की राजधानी का नाम दिया गया। यह राज्य का प्रमुख वाणिज्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र है।

1815 से पहले छोटे हथेलियों को दर्ज किया गया था जब ब्रिटिश सेनाओं ने क्षेत्र पर नियंत्रण लिया था। जलवायु स्थितियों ने अंग्रेजों को हिमालय के घने जंगल में शहर स्थापित करने के लिए आकर्षित किया। ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में, शिमला ने 1914 के सिमला समझौते और 1945 के शिमला सम्मेलन समेत कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों की मेजबानी की। आजादी के बाद, हिमाचल प्रदेश राज्य 28 रियासतों के एकीकरण के परिणामस्वरूप 1948 में आया। आजादी के बाद भी, शहर 1 9 72 के शिमला समझौते की मेजबानी करने वाला एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र बना रहा। हिमाचल प्रदेश राज्य के पुनर्गठन के बाद, मौजूदा महासु जिले का नाम शिमला रखा गया। इसका नाम हिंदू देवी काली के अवतार देवी श्यामला देवी से लिया गया है।

शिमला कई इमारतों का घर है जो ट्यूडरबेथन और औपनिवेशिक युग से संबंधित नव-गोथिक वास्तुकलाओं के साथ-साथ कई मंदिरों और चर्चों में स्थित हैं। औपनिवेशिक वास्तुकला और चर्च, मंदिर और शहर के प्राकृतिक पर्यावरण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। आकर्षण में वाइसराय लॉज, क्राइस्ट चर्च, जाखू मंदिर, मॉल रोड और रिज शामिल हैं, जो एक साथ शहर के केंद्र का निर्माण करते हैं। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, अंग्रेजों द्वारा निर्मित कालका-शिमला रेलवे लाइन भी एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। अपने खड़ी इलाके के कारण, शिमला पर्वत बाइकिंग दौड़ एमटीबी हिमालय की मेजबानी करता है, जो 2005 में शुरू हुई थी और इसे दक्षिण एशिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी घटना माना जाता है। शिमला में दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा प्राकृतिक आइस स्केटिंग रिंक भी है। पर्यटन केंद्र होने के अलावा, शहर कई कॉलेजों और शोध संस्थानों के साथ एक शैक्षणिक केंद्र भी है।

जलवायु

शिमला में कोपेन जलवायु वर्गीकरण के तहत एक उपोष्णकटिबंधीय हाईलैंड जलवायु (सीडब्ल्यूबी) है। शिमला में जलवायु सर्दियों के दौरान मुख्य रूप से ठंडा होता है और गर्मी के दौरान मामूली गर्म होता है।  तापमान आमतौर पर एक वर्ष के दौरान -4 डिग्री सेल्सियस (25 डिग्री फारेनहाइट) से 31 डिग्री सेल्सियस (88 डिग्री फारेनहाइट) तक होता है।

गर्मियों के दौरान औसत तापमान 19 और 28 डिग्री सेल्सियस (66 और 82 डिग्री फारेनहाइट) के बीच होता है, और सर्दियों में -1 और 10 डिग्री सेल्सियस (30 और 50 डिग्री फारेनहाइट) के बीच होता है। नवंबर में मासिक वर्षा 15 मिलीमीटर (0.5 9 इंच) और अगस्त में 434 मिलीमीटर (17.1 इंच) के बीच बदलती है। यह आमतौर पर सर्दियों और वसंत के दौरान 45 मिलीमीटर (1.8 इंच) प्रति माह, और जून में लगभग 175 मिलीमीटर (6.9 इंच) मानसून के दृष्टिकोण के रूप में होता है।

औसत कुल वार्षिक वर्षा 1,575 मिलीमीटर (62 इंच) है, जो कि अन्य पहाड़ी स्टेशनों की तुलना में काफी कम है लेकिन मैदानों की तुलना में अभी भी काफी भारी है। इस क्षेत्र में बर्फबारी, जो दिसंबर के महीने में ऐतिहासिक रूप से हुई है, हाल ही में (पिछले पंद्रह वर्षों में) जनवरी या हर साल फरवरी की शुरुआत में हो रही है।

हाल के दिनों में प्राप्त अधिकतम बर्फबारी 18 जनवरी 2013 को 38.6 सेंटीमीटर (15.2 इंच) थी। लगातार दो दिन (17 और 18 जनवरी 2013), शहर को 63.6 सेंटीमीटर (25.0 इंच) बर्फ मिला।

ऊंचाई – 2,276 m

सिरमौर

सिरमौर भारत के हिमाचल प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में दक्षिणी सबसे ज़िला है। यह काफी हद तक पहाड़ी और ग्रामीण है, इसकी 9 0% आबादी गांवों में रहती है। इसके कुछ लोकप्रिय शहरों में नहान (राजधानी), पोंटा साहिब और सुकेती शामिल हैं, जो बाद में शिवालिक जीवाश्म पार्क के लिए प्रसिद्ध हैं, जहां 85 मिलियन वर्ष से अधिक जीवाश्म पाए गए हैं।

संस्कृति अधिकांश आबादी हिंदू है और इसलिए अधिकांश लोग हिंदू देवताओं (देवता) की पूजा करते हैं और विभिन्न संबंधित रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों का पालन करते हैं। [उद्धरण वांछित] स्थानीय भाषा सिर्मौरी है। बिशू एक लोकप्रिय मेला है जो कई स्थानों पर आयोजित होता है, और थोडा नृत्य की सुविधा देता है। नती, जी, रस और बुद्धचु सिरमौर में लोक नृत्य की लोकप्रिय शैलियों हैं। इनका आनंद विवाह और दिवाली त्यौहार जैसे अवसरों में किया जाता है।

ऊंचाई – 11965 feet

सोलन

सोलन भारतीय हिमाचल प्रदेश राज्य में सोलन जिले का जिला मुख्यालय है (1 सितंबर 1 9 72 को बनाया गया)। हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी नगर परिषद, यह राज्य की राजधानी शिमला के 46 किलोमीटर (2 9 मील) दक्षिण में स्थित है। 1,600 मीटर (5,200 फीट) की औसत ऊंचाई पर। [1] इस जगह का नाम हिंदू देवी शुलिनी देवी के नाम पर रखा गया है। हर साल जून के महीने में, देवी मनाते हुए एक मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें केंद्रीय थोडो मैदानों में 3-दिन का मेला होता है। सोलन पूर्व रियासत राज्य बागघाट की राजधानी थी।

इस क्षेत्र में विशाल मशरूम खेती के साथ-साथ चंबघाट में स्थित मशरूम रिसर्च (डीएमआर) निदेशालय के कारण इसे “मशरूम शहर” के नाम से भी जाना जाता है।

जलवायु

औसतन 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, सोलन को ठंडा हिल स्टेशन कहा जा सकता है। सोलन शहर न तो शिमला के रूप में बहुत ठंडा है, न ही कालका के रूप 
में बहुत गर्म है क्योंकि तापमान 32 डिग्री सेल्सियस (90 डिग्री फारेनहाइट) से अधिक नहीं बढ़ता है। यही कारण है कि इसे आवासीय दृष्टिकोण से आदर्श स्टेशन माना 
जाता है। सर्दियों के दौरान सोलन का अनुभव थोड़ा बर्फबारी है। तापमान आमतौर पर -4 डिग्री सेल्सियस (25 डिग्री फारेनहाइट) से 32 डिग्री सेल्सियस (9 0 डिग्री फारेनहाइट)
 से एक वर्ष के दौरान होता है, जिसमें 37 डिग्री सेल्सियस का उच्च तापमान रिकॉर्ड होता है।


ऊंचाई – 1,502 m

उना

उना हिमाचल प्रदेश के उना जिले में एक नगरपालिका परिषद शहर है। यह उना जिले के मुख्यालय के रूप में कार्य करता है। उना किला का घर है, जो एक ऐतिहासिक किला है और सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक के वंशजों का पूर्वज है।

जनसांख्यिकी
भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, उना शहर की जनसंख्या 18,722 थी जिसमें 9, 851 पुरुष और 8,871 महिलाएं थीं। साक्षरता दर 86.21% थी, जो 82.80% की औसत औसत से अधिक थी। पुरुष साक्षरता और महिला साक्षरता दर क्रमशः 88.84 और 83.2 9% थीं। छह साल से कम उम्र के 1,954 बच्चे थे। शहर का लिंग अनुपात और बाल लिंग अनुपात क्रमशः

ऊंचाई – 369 m